निदेशालय के बारे में सन् 1963 में भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने उच्चतर शिक्षा में माध्यम परिवर्तन के कार्यक्रम के तहत विभिन्न विश्वविद्यालयों में अनुवाद एकक स्थापित करने का विशेष प्रयास किया। इसी प्रयास के अंतर्गत सन् 1963 ई. में ए- 6/7, मॉडल टाउन में दिल्ली विश्वविद्यालय के अंतर्गत एक अनुवाद एकक की नींव रखी गई। जिसका नाम रखा गया अनुवाद निदेशालय। अनुवाद निदेशालय को अपनी गतिविधियाँ संचालित करने के लिए भारत सरकार से शत-प्रतिशत अनुदान प्राप्त होता था। जिसमें पुस्तक प्रकाशन पर होने वाले व्यय के साथ-साथ प्रशासनिक व्यय भी शामिल था। 1968 में शिक्षा मंत्रालय ने अपनी योजना में कुछ परिवर्तन किया और स्नातक स्तर की पाठ्य-पुस्तकों के प्रकाशन पर जोर दिया।
इसी परिवर्तित योजना के अनुसार इस निदेशालय का नाम बदलकर ‘विश्वविद्यालय ग्रंथ निर्माण योजना’ कर दिया गया। 1971 में निदेशालय की कार्य योजना में ‘समालोचना’ कार्य भी एक विषय रूप में जुड़ गया। 1963-78 तक की अवधि में यह निदेशालय भारत सरकार की एक योजना के रूप में कार्य करता रहा। 1978 में शिक्षा मंत्रालय के सुझाव पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने निर्णय लिया कि दिल्ली विश्वविद्यालय इस निदेशालय को अपने अंतर्गत संचालित करे। 1 अप्रैल 1978 से यह निदेशालय, दिल्ली विश्वविद्यालय के एक विभाग के रूप में कार्य करने लगा। 23 मई 1978 की कार्यकारी परिषद् ने इसकी पुष्टि की। तब इसके नाम में एक बार फिर परिवर्तन किया गया और इसका नाम हिंदी माध्यम कार्यान्वय निदेशालय रखा गया।
हिंदी माध्यम कार्यान्वय निदेशालय पाठ्यक्रम पर आधारित तथा अन्य आवश्यक विषयों पर मौलिक पुस्तक लेखन तथा सम्पादन का कार्य करता है। विविध विषयों से संबंधित 150 से अधिक पुस्तकों का लेखन और संपादन निदेशालय के अंतर्गत हो चुका है। आवश्यकता के अनुरूप पुस्तक लेखकों द्वारा पुस्तक में संशोधन कराना और उनके पुनर्मुद्रण का कार्य भी समय-समय पर किया जाता है। निदेशालय पुस्तकों के मुद्रण, विक्रय कार्य के साथ-साथ पुस्तक मेला जैसे अनेक आयोजनों में सक्रिय सहभागिता भी करता है। हिंदी माध्यम से शिक्षा देने के स्तर में सुधार लाने के उद्देश्य से कार्यशालाओं तथा व्याख्यानमालाओं का आयोजन भी करता है। इस वर्ष भी निदेशालय द्वारा महाविद्यालयों के शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति - 2020 के अनुसार हिंदी माध्यम में पाठ्यक्रम आधारित पुस्तकों के मौलिक लेखन, संपादन और अनुवाद हेतु पत्र लिखकर आमंत्रित किया गया है। योजना के अनुसार इस वर्ष विविध विषयों से संबंधित 10 से अधिक नवीन पुस्तकों के प्रकाशन की योजना है। इसके निमित्त कुछ पुस्तकों के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। कुछ पुस्तकों के पुनर्मुद्रण का कार्य भी किया जाएगा।
निदेशालय द्वारा अक्टूबर - 2025 में एक अभिप्रेरणा कार्यक्रम का आयोजन प्रस्तावित है। जिसमें दिल्ली विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों के शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 के अनुसार, पाठ्यक्रम के अनुरूप, हिंदी माध्यम कार्यान्वय निदेशालय के लिए हिंदी माध्यम में स्तरीय पुस्तक लेखन हेतु प्रेरित करने की योजना है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 के अनुरूप विद्यार्थियों को हिंदी माध्यम में पुस्तकें उपलब्ध कराना अत्यंत आवश्यक है और निदेशालय इस दायित्व की पूर्ति में अपना सर्वोत्तम योगदान सुनिश्चित करना चाहता है।
हिंदी माध्यम कार्यान्वय निदेशालय, दिल्ली विश्वविद्यालय की मूल भावना और उद्देश्यों के अनुरूप वेबसाइट को भी नया रूप देने की योजना है। निदेशालय की वेबसाइट फ़िलहाल व्यवहार में नहीं है। निदेशालय के कार्य, योजनाओं को यह वेबसाइट पूरी तरह प्रतिबिंबित कर सके, इसको लेकर कार्य किया जा रहा है।
नाम/Name
1. डॉ. जगदीश प्रसाद मूना
Dr Jagdish Prasad Muna
2. डॉ. लज्जा राम सिंघल
Dr Lajja Ram Singhal
3. डॉ. श्याम कश्यप
Dr Shyam Kashyap
4. डॉ. सुजाता राय
Dr Sujata Roy
5. डॉ. आशा गुप्ता
Dr Asha Gupta
6. प्रो. कुमुद शर्मा
Prof. Kumud Sharma
7. प्रो. मंजु मुकुल कांबले
Prof. Manju Mukul Kamble
पद/ Designation
संस्थापक एवं पूर्व निदेशक
Founder & Ex Director
पूर्व कार्यवाहक निदेशक
Ex Officiating Director
पूर्व कार्यवाहक निदेशक
Ex Officiating Director
पूर्व कार्यवाहक निदेशक
Ex Officiating Director
पूर्व निदेशक
Ex Director
कार्यवाहक निदेशक
Officiating Director
कार्यवाहक निदेशक
Officiating Director